From the Soul to the nib of the Pen

penआज रात मेरी यह ख़ामोशी

आज रात मेरी यह ख़ामोशी उसे सुना देना
कुछ ना सुने तो आंसू से फैली श्याही दिखा देना
मैं तो घायल हू दी गई उसकी खता से
तुम जुर्म इ-मोहब्बत के कुछ फ़साने सुना देना
आज रात मेरी यह ख़ामोशी उसे सुना देना।

आज रात मेरी यह ख़ामोशी उसे सुना देना
लगी हो अगर उसके भी दिल में आग
तुम मेरे पुराने खातों से भुजा देना
ख़त अब जो ना लिख सके उसे अल्विदा का
तुम इन सिसकियों का गीत सुना देना
आज रात मेरी यह ख़ामोशी उसे सुना देना।


 Aaj raat meri yeh khamoshi

Aaj raat meri yeh khamoshi use suna dena
Kuch na sune toh aansu se fehli shayahi dekha dena
Mei toh ghayal hu de gayi uski khata se
Tum jurm-e-mohobbat ke kuch fasane suna dena
Aaj raat meri yeh khamoshi use suna dena.

Aaj raat meri yeh khamoshi use suna…

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